महंगे जीवन यापन संकटों से, निर्धनतम जन सबसे ज़्यादा प्रभावित - अंकटाड

महंगे जीवन यापन संकटों से, निर्धनतम जन सबसे ज़्यादा प्रभावित - अंकटाड

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संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास संगठन (UNCTAD) ने मंगलवार को कहा है कि दुनिया भर में तेज़ी से आसमान छूती महंगाई और बढ़ते क़र्ज़ के कारण खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों की वजह से, करोड़ों लोग जीवन यापन की बहुत महंगी क़ीमतों के संकटों का सामना कर रहे हैं, जिनके कारण निर्बल हालात वाले उपभोक्ता, बहुत ख़राब स्थिति में धकेल दिये गए हैं. 

अंकटाड का विश्लेषण दिखाता है कि खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में 10 प्रतिशत के उछाल से, निर्धन परिवारों की आय में 5 प्रतिशत की कमी हो जाती है, ये संख्या उस धनराशि के बराबर होगी जो वो परिवार, आमतौर पर अपनी स्वास्थ्य देखभाल ज़रूरतों पर ख़र्च करते हैं.

ऐसे में जबकि उपभोक्ता अपने ख़र्च में कटौती करने की कोशिश कर रहे हैं तो, वो अगर सस्ते, मगर असुरक्षित पदार्थ ख़रीदेंगे तो वो उन्हें और भी ज़्यादा महंगे पड़ेंगे.

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) से मिली ख़बरों के अनुसार, ख़राब गुणवत्ता वाले उपभोक्ता पदार्थों से सम्बद्ध हर साल 43 हज़ार लोगों की मौत होती है, और चार करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं या घायल होते हैं, इस सबसे हर साल प्रति व्यक्ति तीन हज़ार डॉलर की रक़म के बराबर नुक़सान होता है.

अंकटाड की महासचिव रिबेका ग्रिन्सपैन 18 और 19 जुलाई को हुई उपभोक्ता संरक्षण पर अन्तर-सरकारी बैठक में कहा, “देशों की सरकारों को अपने उपभोक्ताओं को संरक्षण मुहैया कराने के अपने दीर्घकालीन मिशन को जारी रखने और उसमें सफल होने के लिये प्रयासरत रहना होगा, ये मिशन आज के हालात में फिर से ताज़ा हो रहा है.”

सीमा-पार से जोखिम

दुनिया भर के देशों की सरकारों के लिये, अपने उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना, आमतौर पर शीर्ष प्राथमिकता है. 

संगठन का कहना है कि एक तरफ़ विकसित देशों ने उत्पाद सुरक्षा ढाँचे बनाए हैं जिनमें क़ानून, क्रियान्वयन संस्थान, उत्पादों को वापिस लेना और संचार अभियान जैसे उपाय शामिल हैं, वहीं विकासशील देशों में कमज़ोर प्रणालियाँ हैं जो असुरक्षित उत्पादों के अभिशाप को नियंत्रित करने में असमर्थ हैं.

इसलिये सर्वजन के लिये उत्पाद सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिये, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की दरकार है.

अंकटाड ने उत्पाद सुरक्षा पर अपनी प्रथम सिफ़ारिश 2020 में तैयार की थी. इसमें अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बेचे-ख़रीदे जा रहे असुरक्षित उत्पादों पर क़ाबू पाने का उद्देश्य रखा गया है, जिसके लिये उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा अधिकारियों के बीच सहयोग मज़बूत करना और व्यापार और उपभोक्ताओं को सम्वेदनशील बनाना शामिल है.

क्षेत्रीय है सुरक्षित

अंकटाड के विश्व उपभोक्ता संरक्षा मानचित्र के अनुसार, 60 प्रतिशत देशों के पास, उपभोक्ता संरक्षण के मामले में, सीमा-पार क्रियान्वयन का अनुभव नहीं है.

अंकटाड की बैठक में शिरकत करने वाले उच्च स्तरीय अधिकारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्ति की कि ज्ञात असुरक्षित उपभोक्ता पदार्थों के सीमा-पार वितरण को रोकना, देशों के लिये एक प्राथमिकता है, क्योंकि इससे उपभोक्ता विश्वास बेहतर होगा और टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

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